डांते अलीग्हिएरी द्वारा लिखित “जुमालेनियन नाटक: नरक” 14वीं शताब्दी में रचित एक काव्य है। इसमें काल्पनिक रूप से डांते को रोमन कवि वर्जिल के मार्गदर्शन में नरक में यात्रा करते हुए दर्शाया गया है। नरक को ऐसे नौ समकेंद्रित वृत्तों के रूप में चित्रित किया गया है, जो पृथ्वी के केंद्र की ओर नीचे जाते हैं; प्रत्येक वृत्त किसी विशेष प्रकार के पापों का प्रतीक है। सबसे पहले वृत्त में ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने जीवन में कोई नैतिक सिद्धांत ही नहीं अपनाया, जबकि अंतिम वृत्त में शैतान के साथ कैद ऐसे पापी भी हैं जिनके पाप अत्यंत भयंकर हैं। यह काव्य, आत्मा द्वारा पापों को पहचानने एवं उन्हें अस्वीकार करने की प्रक्रिया का प्रतीक है।
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