थियोडोर रूजवेल्ट द्वारा लिखित “अफ्रीकी एवं यूरोपीय भाषण” 20वीं सदी की शुरुआत में उनकी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान दिए गए भाषणों एवं संबोधनों का संग्रह है। 1910 के दशक में लिखी गई इस पुस्तक में रूजवेल्ट ने अफ्रीका एवं यूरोप की यात्राओं के दौरान शासन, उपनिवेशवादी जिम्मेदारियों एवं नागरिक अधिकारों के महत्व पर चर्चा की है। इन भाषणों में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, गणराज्य में नागरिकता एवं शासन में नैतिक मूल्यों की भूमिका जैसे विषयों पर बल दिया है। इस पुस्तक में रूजवेल्ट की ऑक्सफोर्ड, सॉरबोन आदि प्रतिष्ठित संस्थानों में दिए गए भाषणों का विस्तृत वर्णन भी है। इन यात्राओं के दौरान रूजवेल्ट ने कानून एवं व्यवस्था के सिद्धांतों की वकालत की, साथ ही नागरिक एवं सरकारी कर्मचारियों की स्थिरता एवं न्याय के प्रचार-प्रसार में भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने मिस्र एवं सूडान की राजनीतिक स्थिति पर अपनी टिप्पणियाँ भी कीं, एवं शहरीकरण की प्रगति हेतु मजबूत एवं प्रभावी सरकार की आवश्यकता पर जोर दिया। इन विषयों के माध्यम से रूजवेल्ट ने न केवल इन क्षेत्रों में हुई प्रगति की सराहना की, बल्कि उपनिवेशवाद, स्थानीय शासन एवं वैश्विक जिम्मेदारियों के बीच के जटिल संबंधों पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया।