प्लेटो का “फिलेबस” लगभग 360–347 ईसा पूर्व लिखा गया एक दार्शनिक संवाद है। इसमें सुकरात और दो युवा एथेनियाई लोगों के बीच इस बात पर वाद-विवाद प्रस्तुत किया गया है कि सर्वोच्च भलाई सुख है या विवेक। यह वार्तालाप विभिन्न सुखों की प्रकृति और उनकी श्रेणी का अन्वेषण करता है तथा लाभकारी और हानिकारक रूपों में भेद करता है। इस नैतिक अन्वेषण के माध्यम से सुकरात सत्ता, ज्ञान और उचित माप से जुड़े व्यापक प्रश्नों की पड़ताल करते हैं। संवाद एक ऐसी सार्वभौमिक मूल्य-व्यवस्था पर समाप्त होता है, जो अच्छे जीवन में सुख को उसका उचित—परंतु अधीनस्थ—स्थान प्रदान करती है।
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