सेंट थॉमस एक्विनास द्वारा लिखित “सुम्मा थियोलॉजिका, भाग I-II (पार्स प्रीमा सेकंडे)” एक धार्मिक ग्रंथ है, जो 1265–1274 के बीच लिखा गया। इस भाग में नैतिकता संबंधी सामान्य सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं, जिसमें कानून संबंधी व्यापक सिद्धांत भी शामिल हैं। शुरुआती धार्मिक अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए एक शैक्षणिक मार्गदर्शिका के रूप में तैयार किए गए इस ग्रंथ में प्रश्नोत्तरी प्रारूप का उपयोग किया गया है; इसमें आपत्तियाँ, प्रति-तर्क एवं व्यवस्थित उत्तर भी शामिल हैं। ईसाई, इस्लामी, यहूदी एवं पारंपरिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी का उपयोग करके इस अधूरे महाकृति में मानव उद्देश्य, सद्गुण एवं ईश्वरीय मार्गदर्शन संबंधी मौलिक प्रश्नों का गहन दार्शनिक विश्लेषण किया गया है।