जी. के. चेस्टरटन का नाटक “मैजिक” 1913 में लिखा गया एक हास्य नाटक है। कहानी एक जादूगर के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जिसके करतब आस्था और तर्कवाद के बीच संघर्ष पैदा करते हैं। जब एक युवती ज़ोर देकर कहती है कि उसका जादू वास्तविक है और उसका संशयवादी भाई उन मायावी दृश्यों की व्याख्या नहीं कर पाता, तो वह पागलपन की ओर उतरने लगता है। एक ड्यूक, डॉक्टर और पादरी को जादूगर को अपने रहस्य उजागर करने के लिए राज़ी करना पड़ता है, ताकि उसकी मानसिक संतुलन बहाल हो सके। यह कल्पनापूर्ण हास्य नाटक सत्य, आस्था और भ्रम तथा वास्तविकता के बीच की सीमाओं की पड़ताल करता है।
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