फ्रेडरिक विल्हेल्म नीत्शे द्वारा लिखित “इस प्रकार बोला जराथुस्त्रा: सभी के लिए, लेकिन किसी के लिए नहीं” एक दार्शनिक काल्पनिक रचना है; इसे 1883 से 1885 के बीच प्रकाशित किया गया। प्राचीन भविष्यवक्ता जराथुस्त्रा के माध्यम से नीत्शे ने ऐसे विषयों पर व्याख्यान दिए, जो भौतिक से लेकर अध्यात्मिक तक शामिल हैं। इस रचना में “ओवरमैनश”, “ईश्वर की मृत्यु”, “शक्ति प्राप्त करने की इच्छा” एवं “सदा-चक्रीय पुनरावृत्ति” जैसे मूलभूत नीत्शेयन अवधारणाएँ प्रस्तुत की गई हैं। इसे रूपकात्मक एवं उपमात्मक भाषा में लिखा गया है; यह रचना दशकों तक की एकांत में की गई विचार-प्रक्रियाओं का परिणाम है।
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