चार्ल्स मैके की “Memoirs of Extraordinary Popular Delusions and the Madness of Crowds” भीड़ के मनोविज्ञान का एक आरंभिक अध्ययन है, जो पहली बार 1841 में प्रकाशित हुआ था। यह पत्रकारिता-आधारित कृति तीन खंडों में वित्तीय बुलबुलों, धार्मिक धर्मयुद्धों, डायन-परीक्षणों, रसायनविद्या और अनगिनत अन्य मूर्खताओं के माध्यम से सामूहिक उन्माद के प्रति मानवता की प्रवृत्ति का परीक्षण करती है। मैके रंगीन उपाख्यानों और सनसनीखेज वर्णन के माध्यम से लोकप्रिय भ्रांतियों का खंडन करते हैं—डच ट्यूलिप उन्माद से लेकर दाढ़ी की शैलियों पर राजनीति के प्रभाव तक। आर्थिक बुलबुलों का उनका विश्लेषण आज भी प्रभावशाली है और उन्हें वित्तीय विशेषज्ञों को बाजार के पतन का अनुमान लगाने तथा आधुनिक सट्टेबाजी को समझने में सहायता देने का श्रेय दिया जाता है।
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