जूलियुश स्वोवात्स्की की “अन्हेल्ली” 1837 में लिखी गई एक गद्य-कविता है। अन्हेल्ली नामक एक युवा निर्वासित अपने मार्गदर्शक शमान के साथ साइबेरिया की यात्रा करता है और जमे हुए मरुस्थलों, खदानों तथा कालकोठरियों वाले इस “श्वेत नरक” में पोलिश निर्वासितों की पीड़ा का साक्षी बनता है। अपनी पवित्रता के कारण संभावित उद्धारक के रूप में चुना गया अन्हेल्ली, दांते के नरक की याद दिलाने वाले प्रदेशों से गुजरते हुए क्रूरता का शिकार हुए अपने देशवासियों और उनके भूखे बच्चों से मिलता है। यह मसीहावादी कृति इस प्रश्न पर विचार करती है कि क्या आध्यात्मिक विनाश के लिए अभिशप्त पूरे राष्ट्र को एक व्यक्ति बचा सकता है।
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