मार्क ट्वेन द्वारा लिखित “फॉलोइंग द इक्वेटर: ए जर्नी अराउंड द वर्ल्ड” एक यात्रा-वृत्तांत है, जो 1897 में प्रकाशित हुआ। व्यवसायिक निवेश में असफलता के कारण दिवालियापन की संभावना उत्पन्न हो जाने पर, 60 वर्षीय ट्वेन ने 100,000 डॉलर के कर्ज से बचने हेतु ब्रिटिश साम्राज्य भर में व्याख्यान देने की यात्रा शुरू कर दी। यह गैर-काल्पनिक रचना उनकी इस यात्रा का वर्णन करती है; संस्कृतियों, राजनीति, धर्म एवं रीति-रिवाजों के बारे में उनकी गहरी अवलोकनाओं के साथ ही समाजिक टिप्पणियाँ एवं व्यंग्य भी इसमें शामिल हैं। उल्लेखनीय बात यह है कि ट्वेन ने अपनी इस वास्तविक यात्रा-कहानी में कुछ काल्पनिक घटनाएँ भी शामिल कर दी हैं।
इस पुस्तक के बारे में विकिपीडिया पृष्ठ: en.wikipedia.org/wiki/Following_the_Equator