फ़्रेडरिक पोल की 1955 में प्रकाशित विज्ञान कथा लघुकहानी “द टनल अंडर द वर्ल्ड” में गाइ बर्कहार्ट हर सुबह एक ही दुःस्वप्न और उसी तारीख—15 जून—के साथ जागता है। उसका शहर टाइलर्टन सामान्य दिखाई देता है, फिर भी कुछ बेहद गड़बड़ महसूस होता है। लगातार बजते विज्ञापन-जिंगल वातावरण में गूँजते रहते हैं और हर जगह अजीब विसंगतियाँ उभरती रहती हैं। जब बर्कहार्ट जाँच-पड़ताल शुरू करता है, तो उसे अपनी वास्तविकता के बारे में एक विचलित कर देने वाला सत्य पता चलता है—ऐसा सत्य जो उसके अपने और अपने आसपास की दुनिया के बारे में उसकी हर धारणा को चुनौती देता है।
इस पुस्तक के बारे में विकिपीडिया पृष्ठ: en.wikipedia.org/wiki/The_Tunnel_under_the_World