कोस्तास फाल्ताइत्स की "Αργία: διήγημα" 20वीं शताब्दी के आरंभ में लिखी गई एक कथात्मक रचना है। कहानी का परिवेश नौसैनिक है और इसमें रेनेस नामक एक नाविक पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो अपने आसपास के वातावरण और समुद्र में जीवन की प्रकृति से जूझता है। इसके केंद्रीय विषयों में नौसैनिक जीवन की एकरसता तथा समुद्र और धरती की परस्पर विरोधी सुंदरता शामिल प्रतीत होती है। पाठ का आरंभ पाठक को रेनेस के जीवन में ले जाता है, जो नौसैनिक जहाज़ पर अपने अनुभवों पर विचार करता है। जब वह आसपास की भयावह निस्तब्धता और अपने साथी नाविकों के सौहार्द पर ध्यान देता है, तो उसे अपने अस्तित्व की भावनात्मक और दार्शनिक जटिलताओं का बढ़ता हुआ बोध होता है। कथा समुद्र की जीवंतता और नौसैनिक कर्तव्यों की नीरसता के बीच विरोध स्थापित करती है तथा नाविकों के जीवन, उनके पारस्परिक संबंधों और पहचान तथा स्वयं जीवन पर रेनेस के आत्मचिंतन की बारीकियों की पड़ताल करती है। वातावरण इंद्रियग्राह्य विवरणों से समृद्ध है, जो जहाज़ पर जीवन का सजीव चित्र प्रस्तुत करते हैं।