जॉन केंड्रिक बैंग्स की “मिस्टर मुनचॉज़ेन” 20वीं सदी के आरंभ में लिखी गई मनमौजी और हास्यपूर्ण कथाओं का संग्रह है। यह व्यंग्यात्मक कृति दिग्गज पात्र बैरन मुनचॉज़ेन से जुड़े कई बेतुके साहसिक अभियानों को प्रस्तुत करती है, जो शेखीभरी बहादुरी और असंभव कारनामों की अपनी लंबी-लंबी कहानियों के लिए प्रसिद्ध हैं। काल्पनिक कथा-कहने के माध्यम से यह पुस्तक मानव स्वभाव और स्वयं कहानी-कहने की बेतुकी प्रवृत्तियों में उतरती है और पाठकों के सामने साहित्य में यथार्थवाद तथा सत्यता की चंचल आलोचना रखती है। कृति का आरंभ एक रोचक आधारभूमि स्थापित करता है: “गेहेना गज़ेट” का एक साक्षात्कारकर्ता स्वयं बैरन की ओर से आई एक रहस्यमय कॉल प्राप्त करता है, जो परलोक में निवास करता है। बैरन दावा करता है कि उसके पास सुनाने के लिए अनगिनत अद्भुत कहानियाँ हैं और वह अपनी हाल की रोमांचक यात्राएँ साक्षात्कारकर्ता को बोलकर लिखवाने के लिए सहमत हो जाता है। यह मनमौजी प्रारूप हास्य और कल्पना के मिश्रण की भूमिका तैयार करता है, क्योंकि बैरन मछली पकड़ने के भव्य कारनामों, असंभव गोल्फ-विजयों और जानवरों के साथ हुई मुलाकातों का वर्णन करता है। इससे संकेत मिलता है कि उसकी बढ़ा-चढ़ाकर कही गई कहानियाँ कहानी-कहने की कला को ऊँचा उठाने के साथ-साथ सत्य और झूठ की प्रकृति का ही मज़ाक उड़ाती हैं। इसका लहजा हल्का-फुल्का और चतुर है, जो पाठकों को अविश्वास को कुछ देर के लिए परे रखकर मुनचॉज़ेन की दुनिया की विलासपूर्ण कल्पनाशीलता का आनंद लेने का निमंत्रण देता है।
इस पुस्तक के बारे में विकिपीडिया पृष्ठ: en.wikipedia.org/wiki/Mr._Munchausen