हांस होल्टेन-बेख्टोल्सहाइम की “ग्रीक पौराणिक कथा” 20वीं सदी के आरंभ में लिखी गई एक विद्वत्तापूर्ण कृति है। यह पुस्तक प्राचीन यूनानी पौराणिक कथाओं में गहराई से उतरती है और विभिन्न मिथकों तथा देवताओं की उत्पत्ति, विषय-वस्तु और सांस्कृतिक महत्त्व का अन्वेषण करती है। इसका उद्देश्य यह समझ प्रदान करना है कि यूनानी मिथक अस्तित्व, जीवन और दैवी सत्ता से जुड़े मानव के मूलभूत प्रश्नों को किस प्रकार संबोधित करते हैं। कृति का आरंभिक भाग पाठक को प्रकृति और मानवता से संबंधित आदिम चिंतन की मूलभूत अवधारणाओं से परिचित कराता है। होल्टेन-बेख्टोल्सहाइम चर्चा करते हैं कि प्राचीन लोग आधुनिक व्यक्तियों से भिन्न रूप में संसार को देखते थे और अपने अनुभवों की व्याख्या करने के लिए अवलोकन तथा पौराणिक कथावाचन पर निर्भर रहते थे। वे रेखांकित करते हैं कि मिथक सृष्टि और अस्तित्व से जुड़े प्रश्नों, साथ ही मनुष्यों और देवताओं के बीच संबंधों में निहित हैं, जिससे आगे के अध्यायों में यूनानी पौराणिक कथाओं की गहन पड़ताल की भूमिका तैयार होती है।