सी. लॉयड मॉर्गन द्वारा लिखित "Animal Behaviour" 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में प्रकाशित एक वैज्ञानिक कृति है। यह पुस्तक पशु-व्यवहार के विभिन्न पहलुओं का अन्वेषण करती है और जैविक प्रतिक्रियाओं, चेतना, सहज तथा बुद्धिमत्तापूर्ण व्यवहारों, और इन प्रतिक्रियाओं के विकासवादी महत्त्व का परीक्षण करती है। यह जीवविज्ञान, मनोविज्ञान और दर्शनशास्त्र की अवधारणाओं को समन्वित कर यह समझने में अंतर्दृष्टि प्रदान करती है कि पशु अपने पर्यावरण के साथ किस प्रकार अंतःक्रिया करते हैं। पुस्तक का आरंभ "व्यवहार" की अवधारणा को व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत करता है और यह रेखांकित करता है कि इसे मानव क्रियाओं से लेकर परमाणुओं तथा पौधों की गतियों तक अनेक प्रकार की घटनाओं पर लागू किया जा सकता है। मॉर्गन इस बात पर ज़ोर देते हैं कि व्यवहार उत्पन्न करने वाली परिस्थितियों को समझना महत्त्वपूर्ण है, चाहे बात पैरामीशियम जैसे सरल जीवों की हो या अधिक जटिल पशुओं की। वे पाठक को कोशिकाओं के जैविक व्यवहार, उनके बीच सामूहिक व्यवहार, और इनसे उच्चतर पशुओं में दिखाई देने वाले व्यवहार के विकास पर चर्चा के लिए तैयार करते हैं, जिससे पशु-व्यवहार के विकासवादी तथा चेतन पक्षों के गहन अन्वेषण की आधारभूमि तैयार होती है।