हर्बर्ट जूनियस हार्डविक की “विकासवाद और सृष्टि” 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में प्रकाशित एक वैज्ञानिक कृति है। यह पुस्तक विकासवाद और मानव उत्पत्ति के बीच के जटिल संबंधों का अन्वेषण करती है तथा इन विषयों से जुड़े ऐतिहासिक और वैज्ञानिक विवादों की गहराई से पड़ताल करती है। हार्डविक का उद्देश्य प्राकृतिक नियमों पर आधारित वैज्ञानिक समझ की वकालत करते हुए मनुष्य की उत्पत्ति से संबंधित पारंपरिक मान्यताओं और अंधविश्वासों को चुनौती देना है। पुस्तक का आरंभिक भाग मानव-सृष्टि और विकासवाद के सिद्धांत पर विमर्श की आधारभूमि तैयार करता है। इसकी शुरुआत एक ऐसी प्रस्तावना से होती है जिसमें हार्डविक की पूर्ववर्ती कृति की आलोचनाओं को संबोधित किया गया है और मानवता की वास्तविक उत्पत्ति की अधिक व्यापक पड़ताल की आवश्यकता स्पष्ट की गई है। इस प्रारंभिक खंड में लेखक ग्रह तथा जैविक जीवन के विकास का संक्षिप्त खाका प्रस्तुत करते हुए धार्मिक सृष्टि-मिथकों के विरुद्ध अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करता है। वह शिक्षा के महत्व और स्थापित मान्यताओं तथा उभरते वैज्ञानिक सत्यों के बीच जारी संघर्ष पर बल देता है और विकासवाद की अपनी समीक्षा को मानवता की बौद्धिक प्रगति का एक अनिवार्य अंग स्थापित करता है।