रूडोल्फ़ स्टाइनर की “आध्यात्मिक गतिविधि का दर्शन” 1894 में प्रकाशित एक दार्शनिक कृति है। यह आधारभूत ग्रंथ इस प्रश्न की पड़ताल करता है कि क्या मनुष्य वास्तव में स्वतंत्र हो सकते हैं। स्टाइनर अपने विवेचन को दो मुख्य भागों में बाँटते हैं: पहले वे यह जाँचते हैं कि चिंतन का ज्ञान और प्रत्यक्षण से क्या संबंध है, फिर स्वतंत्रता के लिए आवश्यक शर्तों का विश्लेषण करते हैं और जिसे वे “नैतिक व्यक्तिवाद” कहते हैं, उसका विकास करते हैं। वैज्ञानिक विधियों का अनुसरण करने वाले आत्मनिरीक्षणात्मक अवलोकन के माध्यम से स्टाइनर तर्क देते हैं कि स्वतंत्रता अपने उद्देश्यों के प्रति सचेत होने में निहित है और चिंतन ही वास्तविक मानवीय स्वतंत्रता की कुंजी प्रदान करता है।
इस पुस्तक के बारे में विकिपीडिया पृष्ठ: en.wikipedia.org/wiki/The_Philosophy_of_Freedom
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