जॉन बन्यन द्वारा रचित «राजा एल्शद्दाई द्वारा डायबोलस के विरुद्ध लड़ा गया पवित्र युद्ध» 1682 में प्रकाशित एक उपन्यास है। यह आरंभिक आधुनिक रूपक मैनसोल की कहानी कहता है, जो एक आदर्श नगर है और जिसके नागरिक करिश्माई डायबोलस के बहकावे में आकर अपने वैध शासक शद्दाई के विरुद्ध विद्रोह कर देते हैं। डायबोलस अपना शासन स्थापित करता है, तब शद्दाई अपने पुत्र इमैनुएल को युद्ध करने और पतित नगर को पुनः प्राप्त करने के लिए भेजता है। मानव इंद्रियों के नाम पर रखे गए द्वारों पर होने वाली लड़ाइयों तथा मानवीकृत सद्गुणों और दुर्गुणों के बीच संघर्षों के माध्यम से यह कथा एक महाकाव्यात्मक आध्यात्मिक संघर्ष के रूप में विकसित होती है।