एम. जे. रिचर्डसन और रॉय वाटलिंग की “कीज़ टू फंगी ऑन डंग” 20वीं सदी के उत्तरार्ध में लिखी गई एक वैज्ञानिक कृति है। यह पुस्तक गोबर पर उगने वाले कवकों की पहचान के लिए मार्गदर्शिका का कार्य करती है और शोधकर्ताओं, शिक्षकों तथा कवक-विज्ञान के उत्साही लोगों के लिए उपयोगी कुंजियाँ और विस्तृत विवरण प्रदान करती है। इसमें गोबर पर उगने वाले कवकों की पारिस्थितिक भूमिका और विविधता पर प्रकाश डाला गया है, साथ ही अद्यतन नामावली और अतिरिक्त प्रजातियों के संदर्भ दिए गए हैं। पुस्तक की भूमिका गोबर पर उगने वाले कवकों के विषय का परिचय देती है और पारिस्थितिक विविधता तथा आकारिकी को प्रदर्शित करने में उनके महत्त्व को रेखांकित करती है। इसमें कवकीय वृद्धि के लिए गोबर के नमूने एकत्र करने और उन्हें ऊष्मायित करने के व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं तथा इन जीवों के अवलोकन और पहचान के लिए अनुकूलतम परिस्थितियों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ऊष्मायन के लिए विभिन्न पात्रों के उपयोग से संबंधित विस्तृत विधियों और अवायवीय परिस्थितियों से बचने के महत्त्व पर बल दिया गया है, जिससे आगे आने वाली पहचान-कुंजियों की आधारभूमि तैयार होती है। अंश में उचित अवलोकन के लिए आवश्यक विभिन्न प्रकार की सूक्ष्मदर्शिकी का भी उल्लेख है और प्रभावी पहचान के लिए कवक-विज्ञान की बुनियादी समझ की आवश्यकता को स्वीकार किया गया है।