परमहंस योगानंद द्वारा लिखी गई “एक योगी की आत्मकथा” एक आध्यात्मिक आत्मकथा है, जो 1946 में प्रकाशित हुई। इसमें योगानंद के भारत में बचपन से लेकर अपने गुरु की खोज, क्रिया योग की शिक्षाओं की स्थापना, एवं अमेरिका में उनकी यात्राओं एवं वहाँ “सेल्फ-रियलाइजेशन फेलोशिप” की स्थापना के बारे में विस्तार से बताया गया है। यह पुस्तक पश्चिमी पाठकों को पूर्वी आध्यात्मिक ज्ञान एवं ईश्वर-अनुभव हेतु उपायों से परिचित कराती है; इसमें दो महाद्वीपों पर संतों, वैज्ञानिकों एवं आध्यात्मिक व्यक्तित्वों से हुई उनकी मुलाकातों का भी वर्णन है। इसे बीसवीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पुस्तकों में से एक माना जाता है, एवं दुनिया भर में इसकी लाखों प्रतियाँ बिक चुकी हैं।
इस पुस्तक के बारे में विकिपीडिया पृष्ठ: en.wikipedia.org/wiki/Autobiography_of_a_Yogi