मिखाइल यूरेविच लेर्मोंटोव द्वारा लिखित “हमारे समय का एक नायक” एक उपन्यास है, जो 1839 में लिखा गया एवं 1840 में प्रकाशित हुआ। इसमें “पेचोरिन” नामक एक ऐसे पात्र की कहानी है, जो रूसी साहित्य में “अतिरिक्त/अनावश्यक मनुष्य” का प्रतीक है; उसकी निराशावादी सोच एवं आत्म-विनाशकारी व्यवहार इस पात्र की मुख्य विशेषताएँ हैं। अपनी उपलब्धियों एवं विरोधाभासों के माध्यम से पेचोरिन सुख की तलाश में लगा रहता है, लेकिन अस्तित्वगत खालीपन में डूबता जाता है। उसके रोमांटिक षड्यंत्र एवं मनमाने कार्य अपने पीछे विनाश ही छोड़ते हैं; उसके कारण उन लोगों के लिए भी दुखद परिणाम सामने आते हैं जो उससे प्यार करते हैं। इस उपन्यास को रूस की पहली मनोवैज्ञानिक कथा माना जाता है; यह कैफकासस के सुंदर प्राकृतिक परिदृश्य की पृष्ठभूमि में एक व्यक्ति के गहरे अलगाव को दर्शाता है।
इस पुस्तक के बारे में विकिपीडिया पृष्ठ: en.wikipedia.org/wiki/A_Hero_of_Our_Time “Герой нашего времени” का अनुवाद: “हमारे समय का नायक”。