होनोरे डी बाल्ज़ाक द्वारा लिखित “द मैजिक स्किन” एक उपन्यास है जो 1831 में प्रकाशित हुआ। यह उपन्यास 19वीं शताब्दी के शुरुआती दौर के पेरिस की पृष्ठभूमि पर आधारित है, एवं इसमें एक युवा व्यक्ति की कहानी है जो एक जादुई पत्थर की खोज करता है; यह पत्थर उसकी हर इच्छा पूरी कर देता है। हालाँकि, हर ऐसी इच्छा पूरी होने पर उसकी त्वचा सिकुड़ने लगती है एवं उसकी शारीरिक ऊर्जा भी कम होने लगती है। यह उपन्यास इच्छाओं एवं दीर्घायु के बीच के संघर्ष पर आधारित है, एवं बाल्ज़ाक ने पेरिसी समाज के विस्तृत चित्रण के माध्यम से बुर्जुआवादी भौतिकतावाद का विश्लेषण किया है। इस उपन्यास के कारण होनोरे डी बाल्ज़ाक एक महत्वपूर्ण फ्रांसीसी लेखक के रूप में स्थापित हुए।