ऑनरे द बाल्ज़ाक द्वारा लिखित “तीस वर्ष की स्त्री” 19वीं शताब्दी के आरंभ में लिखा गया एक उपन्यास है। कहानी संभवतः प्रेम, विवाह और संबंधों की जटिलताओं जैसे विषयों का अन्वेषण करती है। इसका केंद्र शीर्षक पात्र जूली और उसके अनुभव हैं, क्योंकि वह फ्रांसीसी इतिहास के एक उथल-पुथल भरे दौर में प्रेम तथा सामाजिक अपेक्षाओं की चुनौतियों का सामना करती है। उपन्यास के आरंभ में हमारा परिचय जूली और उसके पिता से होता है, जो पेरिस में एक सैन्य परेड देखने की तैयारी कर रहे हैं। वातावरण उत्सवपूर्ण है और उस समय के गर्व तथा उल्लास को प्रतिबिंबित करता है, लेकिन अंतर्निहित भावनाएँ गहरी चिंताओं का संकेत देती हैं, विशेषकर उसके पिता की, जो जूली के भावी सुख को लेकर चिंतित प्रतीत होते हैं। कहानी आगे बढ़ने पर जूली की निष्कपटता और युवावस्था के उत्साह का विरोधाभास उसके पिता की सुरक्षात्मक प्रवृत्तियों और आने वाली चुनौतियों की पूर्वछाया से उभरता है। उनके परस्पर संबंध जूली के प्रेम-संबंधों और अंततः कर्नल विक्तोर द'एग्लेमों से उसके विवाह की पड़ताल की आधारभूमि तैयार करते हैं, और उसके जीवन में आने वाली जटिलताओं तथा मोहभंग की भूमिका रचते हैं।