जोसे रिजाल द्वारा लिखित “नोली मी टैंगेरे” एक उपन्यास है, जो 1887 में फिलीपींस पर स्पेन के उपनिवेशीकरण काल के दौरान प्रकाशित हुआ। इस कहानी में क्रिसोस्टोमो इबारा नामक एक युवक की कहानी है; जो सात वर्षों तक यूरोप में पढ़ाई करने के बाद अपने घर लौटता है, लेकिन वहाँ उसे अपने पिता की रहस्यमय मृत्यु एवं उनकी कब्र को भंग कर दिए जाने की बात पता चलती है। जब वह अपने गाँव में एक स्कूल खोलने एवं उसके विकास के लिए प्रयास करता है, तो उसे स्पेनी भिक्षुओं की ओर से दुश्मनी का सामना करना पड़ता है; साथ ही वह कई खतरनाक साजिशों का भी पता लेता है। इबारा के इन संघर्षों के माध्यम से रिजाल ने फिलीपींस के समाज में उपनिवेशी शासन एवं कैथोलिक चर्च के अन्यायों एवं असमानताओं को उजागर किया है।
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