एंतोन पावलोविच चेखव द्वारा लिखित “Der Bär: Groteske in einem Aufzug” 1888 में लिखा गया एकांकी हास्य नाटक है। एक विधवा ज़मींदारिन शोक में अपने-आप को घर में बंद कर लेती है, तभी एक असभ्य लेनदार उसके दिवंगत पति का कर्ज़ तुरंत चुकाने की माँग करते हुए आ पहुँचता है। धन को लेकर शुरू हुआ गरमागरम विवाद गालियों, द्वंद्वयुद्ध की चुनौती और भावनाओं के अप्रत्याशित मोड़ तक पहुँच जाता है। यह प्रहसनात्मक हास्य-नाटक हठी व्यक्तित्वों के टकराव और उन अप्रत्याशित तरीकों की पड़ताल करता है, जिनसे जुनून जन्म ले सकता है।
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