एडमोंद अबू द्वारा लिखित "ला मेयर दे ला मारकिज़" 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लिखा गया एक उपन्यास है। कहानी एलियान बेनोआ नामक एक विधवा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने पिछले दुर्भाग्यों के बावजूद अपनी बेटी लूसील का विवाह कुलीन वंश के किसी पुरुष से कराकर उसके लिए एक प्रतिष्ठित भविष्य सुनिश्चित करने की आकांक्षा रखती है। कथा में महत्वाकांक्षा, सामाजिक प्रतिष्ठा तथा प्रेम और सामाजिक अपेक्षाओं के अंतर्संबंध जैसे विषयों का अन्वेषण किया गया है। उपन्यास के आरंभ में पाठक का परिचय मादाम बेनोआ के चरित्र से कराया जाता है, जिन्हें अपनी युवावस्था की जीवंत स्मृति और अपने परिवार की सामाजिक स्थिति ऊँची उठाने की इच्छा रखने वाली चंचल तथा महत्वाकांक्षी महिला के रूप में चित्रित किया गया है। कथानक की शुरुआत उनकी उन स्मृतियों से होती है, जिनमें वे अपनी बेटी के लिए अवसर तलाशती हैं; पहले वे संभावित वरों से मुलाकातों के बीच राह बनाती हैं और अंततः लूसील का विवाह एक उपयुक्त मार्की से कराने का निश्चय करती हैं। इस भूमिका के माध्यम से सामाजिक आडंबरों और कुलीन पेरिसियन समाज की कठोर दुनिया में मादाम बेनोआ की अटल महत्वाकांक्षा से उत्पन्न जटिलताओं की हास्यपूर्ण पड़ताल के लिए मंच तैयार होता है।