अनाम लेखक की रचना "लिन एर बाओ" संभवतः 18वीं शताब्दी के आरंभ में लिखी गई एक काल्पनिक कथा है। कहानी लियान श्याओचुन नामक दयालु और विनम्र व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो गरीबी के बावजूद दूसरों के लिए अच्छे काम करने में संतोष पाता है। यह कथा सद्गुण, करुणा और इस विचार को उजागर करती है कि अच्छे कर्म अप्रत्याशित पुरस्कार दिलाते हैं। इसमें लियान और एक रहस्यमय व्यक्ति के जीवन आपस में जुड़ते हैं, जो उसके भाग्य का मार्गदर्शन करता हुआ प्रतीत होता है। कथा के आरंभ में हमारा परिचय लियान श्याओचुन और उसके परिवार से होता है, जो कड़ाके की सर्दी में एक भयंकर हिम-तूफान का सामना कर रहे हैं। अपनी करुणामय प्रकृति का परिचय देते हुए लियान एक बेसहारा और ठिठुरते हुए अजनबी को अपने घर में आश्रय देता है और उसके साथ दयालुता से पेश आता है। यह भेंट महज़ आतिथ्य-सत्कार तक सीमित नहीं है; अजनबी के बारे में पता चलता है कि वह एक अलौकिक प्राणी, गाई श्येन वेंग, है, जो लियान की निःस्वार्थता के लिए उसे आशीर्वाद देने का निर्णय करता है। कहानी आगे बढ़ने पर लियान को अनेक परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन वह अपने सद्भावपूर्ण स्वभाव पर अडिग रहता है। इससे पूरी कथा में नियति और सौभाग्य के विषय विकसित होते हैं। आरंभ ही ऐसी कहानी का स्वर निर्धारित कर देता है, जो नैतिक शिक्षाओं से समृद्ध है और जिसमें मानवीय कर्मों तथा ब्रह्मांडीय परिणामों का अंतर्संबंध दिखाई देता है।
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