काज़िमियेज़ ब्रोडज़िन्स्की की “विएस्लाव” 20वीं सदी के आरंभ में रची गई एक ग्रामीण काव्य रचना है। यह कृति पाँच गीतों की शृंखला के रूप में संरचित है और प्रेम, पारिवारिक बंधनों तथा ग्रामीण जीवन जैसे विषयों पर विचार करती है, विशेष रूप से क्राकोव के संदर्भ में। कथा उस समय की सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल की पृष्ठभूमि में पोलिश परंपराओं और अपने पात्रों के भावनात्मक संघर्षों का सार प्रस्तुत करती है। कहानी विएस्लाव नामक एक युवक का अनुसरण करती है, जो प्रेम और पारिवारिक कर्तव्य से प्रेरित होकर क्राकोव में घोड़े खरीदने की यात्रा पर निकलता है और एक स्थानीय विवाह समारोह में हलीना नामक सुंदर युवती पर मोहित हो जाता है। दोनों के साथ नाचने और गाने के दौरान हलीना के प्रति विएस्लाव का स्नेह बढ़ता जाता है और वह अपने प्रेम तथा उससे विवाह करने की इच्छा स्वीकार करता है। हालांकि, यह यात्रा विषाद से भी जुड़ी है, क्योंकि विएस्लाव अपने परिवार को खोने और संबंध की गहरी जड़ें जमा चुकी लालसा से भी जूझता है। कविता का चरम एक पुनर्मिलन में होता है, जो दर्शाता है कि प्रेम पारिवारिक संबंधों की दूरियाँ पाटता है और साथ ही कठिनाइयों तथा विपत्तियों के बीच मानवीय आत्मा के धैर्य पर भी विचार करता है। पूरी रचना में ब्रोडज़िन्स्की के सशक्त पद्य और जीवंत बिंब 19वीं सदी के पोलैंड के ग्रामीण आकर्षण तथा उसके पात्रों की हृदयस्पर्शी भावनाओं को सजीव कर देते हैं।