डब्ल्यू. एच. डेवनपोर्ट एडम्स की “By-ways in Book-land: Short Essays on Literary Subjects” 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लिखे गए साहित्यिक निबंधों का संग्रह है। यह पुस्तक साहित्य के विभिन्न पहलुओं का अन्वेषण करती है और अपने विषयों को प्रायः हल्के तथा चिंतनशील ढंग से प्रस्तुत करती है। यह पाठक का ध्यान साहित्यिक चर्चा के मुख्यधारा वाले विषयों के बजाय उन कम-प्रचलित मार्गों की ओर आकर्षित करती है। एडम्स पुस्तकों और उनके पाठकों के आनंद तथा विचित्रताओं को उजागर करना चाहते हैं। वे नए और पुराने—दोनों प्रकार के साहित्य के आकर्षण, साहित्यिक इतिहास की जटिलताओं और कविता के स्वरूप जैसे विषयों को अपनाते हैं। संग्रह का आरंभ “कागज़-काटने वाले चाकू के सुख” की संकल्पना से होता है, जिसमें पुरानी पुस्तकों और नई पुस्तकें खोजने के आनंद—दोनों का उत्सव मनाया गया है। एडम्स नई पुस्तकों को हाथ में लेने के आनंद पर विचार करते हैं और उनकी ताज़गी तथा उन अनपलटे पन्नों में निहित असीम संभावनाओं पर बल देते हैं। वे नई-नकोर जिल्दों के आकर्षण की तुलना उन प्रिय, किंतु उम्रदराज़ पुस्तकों से करते हैं, जो इतिहास का भार सँजोए रहती हैं। अपनी आकर्षक गद्य-शैली के माध्यम से वे पाठकों को पुस्तकों के साथ अपने संबंधों पर विचार करने के लिए आमंत्रित करते हैं और संकेत देते हैं कि प्रत्येक नई पुस्तक नए उत्साह और प्रत्याशा का अनुभव कराती है—मानो किसी साहित्यिक भू-दृश्य में अन्वेषण का रोमांच हो।