रोअल्ड अमुंडसेन द्वारा लिखित “द साउथ पोल” नॉर्वेजियन अंटार्कटिक अभियान का एक ऐतिहासिक वृत्तांत है; यह अभियान 1910 से 1912 तक “फ्रैम” नामक जहाज पर किया गया। 20वीं सदी की शुरुआत में लिखी गई इस पुस्तक में अमुंडसेन की उस ऐतिहासिक यात्रा का विस्तृत वर्णन है, जिसके द्वारा वे पहले व्यक्ति बने जिन्होंने दक्षिणी ध्रुव तक पहुँचा। इस कहानी में न केवल इस यात्रा के दौरान सामने आई चुनौतियों का वर्णन है, बल्कि इस महत्वपूर्ण प्रयास में शामिल सभी लोगों की टीमवर्क एवं दृढ़ संकल्पशीलता का भी उल्लेख है। पुस्तक की शुरुआत में ही अमुंडसेन ने इस अभियान की तैयारियों का विस्तृत वर्णन किया है; उन्होंने फरवरी से अप्रैल 1911 तक की अपनी खोज यात्रा के दौरान आपूर्ति भंडारों की स्थापना, कुत्तों द्वारा खींचे जाने वाले स्लेजों के उपयोग, एवं बर्फीले वातावरण में संसाधनों के कुशल प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी है। अमुंडसेन ने इस यात्रा के दौरान सामने आए चरम तापमानों एवं उनके जीवित रहने हेतु किए गए उपायों (जैसे उपकरणों में किए गए संशोधन) का भी उल्लेख किया है। पुस्तक का यह अध्याय आगे आने वाली इस महान यात्रा की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करता है, एवं वैज्ञानिक उद्देश्यों एवं व्यक्तिगत दृढ़ संकल्प के मिलन से ही इस ऐतिहासिक अभियान की सफलता संभव हुई, इस बात पर जोर देता है।
दक्षिणी ध्रुव।