बर्नार्ड शॉ द्वारा लिखित “मेजर बारबरा” एक तीन-अध्यायों वाला नाटक है, जिसका प्रथम मंचन 1905 में हुआ। कहानी बारबरा अंडरशॉर्ट के इर्द-गिर्द घूमती है; वह एक आदर्शवादी “सेल्वेशन आर्मी” अधिकारी है, जो लंदन के गरीबों की मदद करती है। लेकिन जब उसका दूर हो चुका पिता एक समृद्ध गोला-बारूद निर्माता के रूप में फिर से सामने आता है, तो उसकी इस कोशिशों में बाधा आ जाती है। जब वह अपना पैसा “सेल्वेशन आर्मी” को दान करता है, तो बारबरा के सामने एक नैतिक संकट खड़ा हो जाता है। उसके पिता का तर्क है कि नियमित रोजगार प्रदान करना दान करने से कहीं अधिक लाभदायक है; इस कारण बारबरा को गरीबी, समृद्धि एवं समाज की मदद के तरीकों पर कठिन सवालों का सामना करना पड़ता है।
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