अलेक्सांद्र ड्यूमा द्वारा रचित «De Drie Musketiers dl. I en II» 1844 में लिखी और प्रकाशित एक फ्रांसीसी ऐतिहासिक साहसिक उपन्यास है। 1625 के फ्रांस में सेट यह कथा युवा दार्ताञ्ञां का अनुसरण करती है, जो पेरिस जाता है इस आशा से कि वह गार्ड के कुलीन मस्कटियरों में शामिल हो सके। तुरंत शामिल न हो पाने पर भी वह तीन प्रसिद्ध मस्कटियरों—एथोस, पोर्थोस और आरामिस—से मित्रता कर लेता है और राजा, रानी ऐन तथा शक्तिशाली कार्डिनल रिचल्यू से जुड़े राज्य के खतरनाक मामलों में उलझ जाता है। वीर तलवारबाज़ों की यह रोमांचक गाथा द्वंद्वयुद्धों, राजनीतिक षड्यंत्रों और शिष्ट साहसिक कारनामों से भरी है।
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