डेविड एम्स वेल्स की "रॉबिन्सन क्रूसोज़ मनी" उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लिखी गई एक ऐतिहासिक कृति है। यह रचना डैनियल डिफो के क्लासिक पात्र रॉबिन्सन क्रूसो से प्रेरणा लेते हुए एक काल्पनिक दूरस्थ द्वीप समुदाय के माध्यम से मुद्रा और करेंसी की अवधारणाओं का रूपकात्मक अन्वेषण प्रस्तुत करती है। आख्यान वस्तु-विनिमय से मुद्रा के प्रचलन तक आर्थिक प्रणालियों के विकास का व्यवस्थित रूप से अनुसरण करता है तथा विभिन्न मौद्रिक सिद्धांतों और प्रथाओं की जटिलताओं व निहितार्थों को उजागर करता है। पुस्तक के आरंभ में लेखक द्वीप समुदाय का परिचय देता है और अस्तित्व की स्थिति में धन की आरंभिक व्यर्थता पर बल देता है। रॉबिन्सन क्रूसो बचाए गए सामान में धन की तीन थैलियाँ पाता है, किंतु शीघ्र ही समझ लेता है कि विनिमय के किसी साधन के अभाव में मुद्रा का कोई वास्तविक मूल्य नहीं होता। जनसंख्या बढ़ने पर—शुक्रवार तथा अंग्रेज नाविकों सहित अन्य पात्रों के आगमन के साथ—आख्यान वस्तु-विनिमय आधारित अर्थव्यवस्था से मौद्रिक प्रणाली अपनाने तक उनके संक्रमण की पड़ताल करता है। आरंभिक अंश प्रत्यक्ष व्यापार में उनके सामने आने वाली चुनौतियों और तत्पश्चात मूल्य के एक स्वीकृत मानक की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं, और अंततः समाज में धन की प्रकृति व भूमिका तथा धन और नैतिकता पर उसके परिणामी प्रभाव पर गहरी चर्चाओं की भूमि तैयार करते हैं।