"स्वस्तिक, ज्ञात प्राचीनतम प्रतीक, और उसकी प्रवास-यात्रा" थॉमस विल्सन का एक ऐतिहासिक वृत्तांत है, जो उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लिखा गया। पाठ स्वस्तिक प्रतीक की उत्पत्ति, अर्थों और प्रवासों में प्रवेश करता है तथा विश्व भर की विभिन्न संस्कृतियों में उसके महत्त्व की पड़ताल करता है। विल्सन इस प्राचीन प्रतीक के विषय में अंग्रेज़ी और अमेरिकी साहित्य में विद्यमान कमी को दूर करने के लिए उपलब्ध ज्ञान का संकलन करना चाहते हैं। कृति का आरंभ दस्तावेज़ के प्रारूप को स्पष्ट करने वाली प्रतिलिपिकार की टिप्पणी से होता है, जिसके बाद विल्सन की भूमिका आती है। उसमें वे एक प्रागैतिहासिक पुरातत्त्व विशेषज्ञ से हुई बातचीत पर चिंतन करते हैं, जिसने अमेरिका में स्वस्तिक पर जानकारी एकत्र करने की उनकी खोज को प्रेरित किया। विल्सन अपने अनुसंधान से प्राप्त ज्ञान को संकलित कर प्रस्तुत करने की इच्छा व्यक्त करते हैं और स्थापित करते हैं कि स्वस्तिक संस्कृतियों और काल को पार करने वाला एक प्रतीक रहा है, जिसे प्रायः शुभ संयोग और आध्यात्मिकता का चिह्न माना जाता है। वे इस बात पर बल देते हैं कि प्रतीक की उत्पत्ति दुर्गम है और यह संभवतः संसार भर में फैला, इस प्रक्रिया में विभिन्न अर्थ ग्रहण करता हुआ।