मचाडो दे असीस का "डोम कासमुरो" 1900 में प्रकाशित एक उपन्यास है। पचास के दशक में पहुँचा धनी वकील बेंटो सैंटियागो अपने बचपन की स्मृतियों, सेमिनरी में बिताए समय और कैपितु से अपने विवाह का वर्णन करते हुए अपने जीवन के दोनों सिरों को फिर से जोड़ने का प्रयास करता है। उसके कथानक के केंद्र में उसकी रोगात्मक ईर्ष्या और व्यभिचार के संदेह हैं। लेकिन क्या पाठक घटनाओं के इस अविश्वसनीय कथावाचक के संस्करण पर भरोसा कर सकते हैं? उपन्यास कैपितु के दोषी होने के केंद्रीय प्रश्न को जानबूझकर अस्पष्ट छोड़ देता है और अनेक व्याख्याओं का आमंत्रण देता है।
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