एमिल ज़ोला का उपन्यास “मनी (ल’आर्ज़ाँ)” 1891 में प्रकाशित हुआ था। द्वितीय साम्राज्य के पेरिस की वित्तीय दुनिया की पृष्ठभूमि में रचा गया यह उपन्यास अरिस्तीद साकार का अनुसरण करता है, जो दिवालिया हो चुका एक सट्टेबाज़ है और मध्य पूर्व में बड़े प्रकल्पों के वित्तपोषण के लिए एक बैंक स्थापित करता है। अवैध शेयर हेरफेर और अथक महत्वाकांक्षा के सहारे साकार का उद्यम चक्कर देने वाली ऊँचाइयों तक पहुँच जाता है। उपन्यास वित्तीय सट्टेबाज़ी के प्रभावों को सभी सामाजिक वर्गों में दर्शाता है—धन और सत्ता से लेकर बर्बादी और निराशा तक—जबकि साकार का साम्राज्य अपने अपरिहार्य पतन की ओर तेज़ी से बढ़ता है।
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