मो़र योकाॅई की “Megtörtént regék: Beszélyek” उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में लिखी गई कथाओं का संग्रह है। यह पुस्तक मानव संबंधों, सामाजिक मुद्दों और नैतिक दुविधाओं में गहराई से उतरने वाली रोचक कहानियों की पड़ताल करती है, जिनमें अक्सर दृढ़ इच्छाशक्ति वाले और जटिल चरित्र दिखाई देते हैं। उनमें लेडी मटिल्डा भी है, जो सौंदर्य और चालाकी का साक्षात रूप है, लेकिन अंततः छल और विश्वासघात के जाल में उलझ जाती है। कथा का आरंभ न्यारि पाल और एक अन्य पात्र के बीच संवाद के माध्यम से पाठक को कहानी की पृष्ठभूमि से परिचित कराता है। सभा के एक नीरस अधिवेशन के दौरान जब न्यारि अपने अतीत की मनोहारी कहानियाँ साझा करता है, तो पहली कथा सामने आती है, जिसका केंद्र मटिल्डा है—एक सुंदर और धनी बैरोनेस। उसकी चकाचौंध भरी जीवनशैली कर्ज़ और जोड़-तोड़ की एक अधिक अंधकारमय वास्तविकता को छिपाती है, क्योंकि वह अपने अलग रह रहे पति और उसकी विरासत से जुड़े उलझावों से निपटती है। कथा मटिल्डा के दोहरे स्वभाव की ओर संकेत करती है और उसकी संपत्ति तथा सामाजिक प्रतिष्ठा की तलाश के इर्द-गिर्द विकसित होने वाले नाटक की पूर्वछाया प्रस्तुत करती है, साथ ही विश्वासघात और कानून तथा नैतिकता के जटिल तंत्र के विषयों को भी स्थापित करती है।