एडवर्ड वेस्टरमार्क की पुस्तक “द हिस्ट्री ऑफ ह्यूमन मैरिज” 1891 में प्रकाशित हुई थी। मानवशास्त्र का यह महत्वपूर्ण अध्ययन विश्व इतिहास में एक सामाजिक संस्था के रूप में विवाह का व्यापक समन्वित विश्लेषण प्रस्तुत करने का प्रयास करता है। वेस्टरमार्क का तर्क है कि विवाह की नींव जैविक आधारों पर टिकी है और यह साथ रहने की इच्छा, आर्थिक सहयोग तथा बच्चों के पालन-पोषण जैसी मानवीय आवश्यकताओं के माध्यम से विकसित हुआ है। इस कृति में उस सिद्धांत का भी परिचय दिया गया है जिसे आगे चलकर वेस्टरमार्क प्रभाव के नाम से जाना गया—यह सिद्धांत निकट संपर्क में पले-बढ़े लोगों के बीच यौन अरुचि और अनाचार संबंधी निषेधों की उत्पत्ति की व्याख्या करता है।
इस पुस्तक के बारे में विकिपीडिया पृष्ठ: en.wikipedia.org/wiki/The_History_of_Human_Marriage