जाँ द ला ब्रेत की “Mon oncle et mon curé; Le voeu de Nadia” 1889 में प्रकाशित एक फ्रांसीसी उपन्यास है। सोलह वर्षीय अनाथ रेन दे लावाल अपनी निरंकुश चाची के नियंत्रण में एकांत जीवन बिताती है और उसका एकमात्र साथी पादरी है। जब एक तूफ़ान के दौरान उसका आकर्षक चचेरा भाई शरण लेने आता है, तो रेन को पहली ही नज़र में उससे प्रेम हो जाता है। चाची की मृत्यु के बाद वह अपने चाचा के क़िले में चली जाती है, जहाँ उसे पता चलता है कि उसके प्रिय चचेरे भाई का विवाह शायद किसी और से तय है। यह मनमोहक कथा फ्रांस में अत्यंत सफल हुई।
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