बर्नार्डुस गेविन का उपन्यास "रेज़ोंटमूटींगेन वान योआखिम पोल्सब्रूकरवाउड एन ज़ाइने फ्रेंडेन" 19वीं शताब्दी के आरंभ में लिखा गया था। कथा नायक योआखिम पोल्सब्रूकरवाउड और उसके मित्रों के साहसिक अनुभवों का अनुसरण करती है, जब वे जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड की यात्रा पर निकलते हैं। चार्ल्स डिकेन्स की रचनाओं से प्रभावित विनोदी शैली में लिखी गई यह पुस्तक यात्रा के दौरान पात्रों की पारस्परिक बातचीत और अनुभवों का अन्वेषण करती है तथा समाज का एक हल्का-फुल्का किंतु सूक्ष्म चित्र प्रस्तुत करती है। उपन्यास का आरंभ हमारा परिचय योआखिम पोल्सब्रूकरवाउड से कराता है, जो सौम्य और शांत स्वभाव का व्यक्ति है तथा अपने चार साथियों के साथ यात्रा की तैयारी कर रहा है। इसमें उनके विविध व्यक्तित्वों का चित्र उभरता है—आकर्षक किंतु आत्ममुग्ध एडुआर्ड वान टोर्तेल्ताक से लेकर विषादग्रस्त ऑगस्ट होल्स्टाफ तक, जो मानवीय पीड़ा और भावनाओं की तलाश करता है। मित्रों के एकत्र होने पर उनकी हँसी-मज़ाक भरी बातचीत उनकी विचित्रताओं और आकांक्षाओं को उजागर करती है और साथ ही उस मैत्रीभाव की झलक देती है जो उनके समूह की पहचान है। कथा उनकी आगामी यात्राओं के लिए मंच तैयार करती है और उनके यात्रा-साहसिक अभियान में आने वाले उत्साह तथा संभावित चुनौतियों—दोनों को रेखांकित करती है।