अलेटा एच. याकब्स की "अफ्रीका और एशिया से यात्रा-पत्र" 20वीं सदी के आरंभ में लिखा गया एक यात्रा-वृत्तांत है। यह कृति विभिन्न देशों, मुख्यतः अफ्रीका और एशिया, की यात्राओं के दौरान लेखिका के अनुभवों को दर्ज करती है और विभिन्न संस्कृतियों के बारे में उनके अवलोकनों तथा अंतर्दृष्टियों को प्रस्तुत करती है। इसमें विशेष रूप से अलग-अलग समाजों में महिलाओं की भूमिका और स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया गया है। वृत्तांत में स्वीडन और नॉर्वे की उनकी यात्राओं के पत्र भी शामिल हैं, जो उनके साहसिक अनुभवों का व्यापक चित्र प्रस्तुत करते हैं। पुस्तक के आरंभ में याकब्स इन पत्रों के पीछे का अपना उद्देश्य बताती हैं। ये पत्र मूलतः समाचार-पत्रों में प्रकाशित करने के लिए लिखे गए थे, जो बाद में इस संकलन का रूप ले बैठे। वह पुस्तक की गुणवत्ता को लेकर कुछ संकोच व्यक्त करती हैं, लेकिन इस बात पर ज़ोर देती हैं कि उनके विवरण विदेशी देशों में प्रत्यक्ष अनुभवों पर आधारित और प्रामाणिक हैं। आरंभिक खंड में स्टॉकहोम में महिलाओं के मताधिकार के लिए विश्व संघ के छठे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उनकी उपस्थिति और विभिन्न देशों की महिला कार्यकर्ताओं तथा प्रतिनिधियों के साथ उनकी बातचीत का वर्णन है। इससे उनकी यात्राओं के दौरान देखे गए भौगोलिक परिदृश्यों और सामने आए सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों, दोनों की खोज का स्वर स्थापित होता है। याकब्स मताधिकार और सशक्तीकरण के लिए प्रयासरत विभिन्न देशों की महिलाओं के बीच सहयोग की भावना को उकेरती हैं और साथ ही स्वीडन के दालेकार्लिया की सुंदरता से लेकर अफ्रीका और एशिया में सामने आने वाली विविध संस्कृतियों तक, मनोहारी दृश्यों के बीच अपनी यात्राओं का विवरण देती हैं।