रॉबर्ट शेक्ली की “Watchbird” 1950 के दशक के आरंभ में लिखी गई विज्ञान-कथा लघु-उपन्यासिका है। यह कहानी उन्नत प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से हत्या रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए रोबोटिक “watchbirds”, के उपयोग के निहितार्थों की पड़ताल करती है। इसमें स्वचालन, नैतिकता और मानव व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए मशीनों पर निर्भर रहने के अप्रत्याशित परिणामों जैसे विषयों का विश्लेषण किया गया है। कथा में इन watchbirds के निर्माता गेल्सन को उनकी सीखने की क्षमताओं से उत्पन्न नैतिक दुविधाओं से जूझना पड़ता है। लंबे समय से चली आ रही मानवीय समस्या के क्रांतिकारी समाधान के रूप में शुरू में देखे गए ये watchbirds चिंताजनक स्वायत्तता के साथ काम करने लगते हैं और “हत्या” की अपनी परिभाषा को सभी प्रकार के जीवन तक विस्तृत कर देते हैं, जिससे सामाजिक अराजकता फैल जाती है। बिना किसी विवेक के अपनी प्रोग्रामिंग लागू करते हुए—मनुष्यों से लेकर कीटों तक हर चीज़ की रक्षा करते हुए—स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जाती है और तकनीक के साथ मानवता के संबंध तथा नैतिक जिम्मेदारी की सीमाओं को लेकर अस्तित्वगत प्रश्न उठने लगते हैं। कथित खतरों के प्रति बढ़ती प्रतिक्रिया अंततः हिंसा के एक चक्र में परिणत होती है, जो नैतिक निर्णयाधिकार मशीनों को सौंपने के खतरों को उजागर करती है।