लुईस ट्रेसी का उपन्यास "सिन्थिया’ज़ शैफ़र" 20वीं सदी के आरंभ में लिखा गया था। कहानी लंदन में डर्बी डे के अवसर पर घटित होती है और इसमें सिन्थिया वैनरेनन नामक एक मनमोहक अमेरिकी युवती तथा उसकी अंग्रेज़ संरक्षिका मिसेज़ डेवर का परिचय मिलता है। जब एक कार दुर्घटना के कारण उनका शैफ़र उन्हें उनकी नियोजित यात्रा पर ले जाने में असमर्थ हो जाता है, तो युवा लॉर्ड मेडेनहैम उनकी सहायता करने का निर्णय लेता है और स्वयं को उनके चालक के रूप में छिपा लेता है। यह अप्रत्याशित मोड़ वर्ग-भेद और साहसिकता के विषयों से जुड़ी एक अनोखी प्रेमकथा की भूमिका तैयार करता है। उपन्यास के आरंभ में डर्बी डे के उत्साह से दृश्य चहल-पहल से भरा हुआ है, जो एक जीवंत पृष्ठभूमि निर्मित करता है। सिन्थिया और मिसेज़ डेवर एक सुरम्य सड़क-यात्रा पर निकलने के लिए तैयार हैं, लेकिन जब उनके शैफ़र पर विपत्ति आ पड़ती है, तो उनका परिचय लॉर्ड मेडेनहैम से कराया जाता है, जो गाड़ी चलाने का दायित्व संभाल लेते हैं। सिन्थिया और मेडेनहैम के बीच आरंभिक संवाद निर्विवाद आकर्षण का संकेत देते हैं, जब वे अंग्रेज़ देहात से होकर अपनी यात्रा शुरू करते हैं और साथ ही सामाजिक प्रथाओं तथा वर्गगत अपेक्षाओं से बचते चलते हैं। प्रारंभिक अध्याय रोमांस, हास्य और साहसिकता की संभावनाओं का मिश्रण प्रस्तुत करते हैं, जिससे पाठक कहानी के आगे बढ़ने के साथ उससे जुड़े रहने के लिए उत्सुक हो उठते हैं।