वॉरेन हिल्टन की पुस्तक "Applied Psychology: Driving Power of Thought" 20वीं सदी के प्रारंभ में लिखी गई एक वैज्ञानिक कृति है। यह पुस्तक व्यक्तिगत और व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के लिए मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों को लागू करने के उद्देश्य से तैयार की गई एक श्रृंखला का हिस्सा है। इसका केंद्रीय विषय व्यावहारिक सफलता और व्यक्तिगत कल्याण प्राप्त करने में विचारों की महत्वपूर्ण भूमिका को समझने पर केंद्रित है। इस कृति में हिल्टन विचार-प्रक्रियाओं के तंत्र का अन्वेषण करते हैं और विशेष रूप से "Causal Judgments" तथा "Classifying Judgments" पर ध्यान देते हैं। वे चर्चा करते हैं कि विचार न केवल मानसिक दृष्टिकोणों को प्रभावित करते हैं, बल्कि उन शारीरिक क्रियाओं के माध्यम से भी प्रकट होते हैं जो उपलब्धि को आगे बढ़ाती हैं। पुस्तक आगे व्यवसाय में भावनात्मक ऊर्जा की पड़ताल करती है और बताती है कि सकारात्मक विचार तथा भावनाएँ उत्पादकता और सफलता को कैसे बढ़ा सकती हैं। हिल्टन मानसिक क्षमताओं के आधार पर कर्मचारियों के चयन के संबंध में व्यावहारिक मार्गदर्शन भी देते हैं और बताते हैं कि मनोवैज्ञानिक परीक्षण नियुक्ति प्रक्रिया में प्रभावी साधनों के रूप में कैसे काम कर सकते हैं, जिससे अधिकतम दक्षता के लिए व्यक्तिगत क्षमताओं को विशिष्ट भूमिकाओं के अनुरूप रखा जा सके। इन अंतर्दृष्टियों के माध्यम से हिल्टन दैनिक जीवन और व्यावसायिक संदर्भों में अनुप्रयुक्त मनोविज्ञान की परिवर्तनकारी शक्ति पर बल देते हैं।