हिप्पो के बिशप संत ऑगस्टीन द्वारा रचित “Confessiones” ईस्वी 397 और 400 के बीच लिखा गया एक आत्मकथात्मक ग्रंथ है। इसे पहली पश्चिमी आत्मकथा माना जाता है। यह तेरह पुस्तकों की उत्कृष्ट कृति ऑगस्टीन की पापपूर्ण युवावस्था से ईसाई धर्म में उनके रूपांतरण तक की यात्रा का वृत्तांत प्रस्तुत करती है। ईश्वर को की गई प्रार्थनाओं के रूप में लिखे गए इस ग्रंथ में ऑगस्टीन अपनी नैतिक विफलताओं, यौन पापों तथा मनीच्यवाद और ज्योतिष के साथ अपने संघर्षों पर विचार करते हैं। अंतरंग स्वीकारोक्तियों और दार्शनिक मननों के माध्यम से वे अन्वेषण करते हैं कि संत एम्ब्रोस और अपनी समर्पित माता मोनिका जैसी विभूतियों के मार्गदर्शन में उनके व्याकुल हृदय को आस्था में किस प्रकार शांति मिली।
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