अदा नेग्री की "मातेरनितात" 20वीं सदी के आरंभ में लिखी गई कविताओं का एक संग्रह है। यह कृति मातृत्व के गहन और जटिल विषयों में उतरती है तथा संसार में एक नए जीवन को लाने के भावनात्मक, शारीरिक और आध्यात्मिक पक्षों का अन्वेषण करती है। सजीव बिंबों और गहरी सहानुभूति के माध्यम से नेग्री मातृत्व का एक सार्वभौमिक उत्सव प्रस्तुत करती हैं, साथ ही उससे जुड़ी कठिनाइयों और पीड़ाओं का भी सामना करती हैं। "मातेरनितात" का आरंभ गर्भावस्था और प्रसव के अनुभव पर एक काव्यात्मक मनन से होता है। वक्ता अजन्मे शिशु के साथ अपने अंतरंग संबंध को व्यक्त करती है और आशा, प्रेम तथा प्रतीक्षा की गहरी भावना प्रकट करती है। ये पद्य गर्भवती माताओं को घेर लेने वाले आनंद और भय के सम्मिश्रण को उकेरते हैं, मातृ-संबंध की पवित्रता और उसके साथ आने वाले संघर्षों को संबोधित करते हैं। प्रभावपूर्ण भाषा के माध्यम से कविता मातृत्व में निहित पीड़ा और त्याग को उजागर करती है तथा सामाजिक चुनौतियों के बीच सृजन का भार उठाने वाली स्त्रियों के प्रति गहरा सम्मान प्रकट करती है।