फ्रांत्ts पॉल लीज़ेगांग कृत „Handbuch der praktischen Kinematographie“ बीसवीं शताब्दी के आरंभ में लिखी गई एक वैज्ञानिक प्रकाशन है। यह कृति सिनेमैटोग्राफी के सिद्धांतों और तकनीकी पक्षों की व्यापक निर्देशिका है, जिसमें किनेमैटोग्राफ की क्रियाविधियों तथा चल-चित्रों के निर्माण पर विशेष बल है। पुस्तक के आरंभ में लेखक किनेमैटोग्राफ की अवधारणा प्रस्तुत करता है और बताता है कि यह प्रकाश-संवेदी फिल्म पर लिए गए तीव्र क्रमिक चित्रों की श्रृंखला द्वारा जीवंत छवियों को कैसे ग्रहण और प्रक्षेपित करता है। लीज़ेगांग फिल्म-संचालन की क्रियाविधि पर विस्तार से लिखते हैं और इस बात पर बल देते हैं कि निर्बाध दृश्य प्रभाव के लिए चित्रों की निरंतर श्रृंखला इतनी शीघ्र दिखाई जानी चाहिए कि वे आँख को तरल प्रतीत हों, जिससे मानव प्रत्यक्षीकरण की सीमाएँ पार हो जाएँ। यह आरंभ फिल्म, प्रोजेक्टरों तथा फिल्म-निर्माण में प्रयुक्त मशीनरी की जटिलताओं जैसे तकनीकी तत्वों की चर्चा की आधारभूमि रखता है और आगे आने वाले विस्तृत अन्वेषण के लिए एक सूक्ष्म, व्यवस्थित स्वर स्थापित करता है।