फेडेरिको दे रोबर्टो का "दोकुमेंती उमानि" 1888 में प्रकाशित लघुकथा-संग्रह है। पॉल बुर्जे के स्कूल की पद्धतियों का अनुसरण करते हुए यह कृति मनुष्यों के विचित्र मनोविज्ञान का दस्तावेज़ प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। तेरहों कहानियाँ ऊपरी दिखावे और भावनाओं के नीचे छिपी वास्तविकताओं का अन्वेषण करती हैं, हालांकि आलोचक सुघड़ गद्य और उन्नत नाटकीय तत्वों से युक्त उनकी रोमानी छाप पर ध्यान देते हैं। यह संग्रह कथाकार के रूप में दे रोबर्टो की विकसित होती परिपक्वता को दर्शाता है और साथ ही मनोवैज्ञानिक पड़ताल तथा विचार-प्रधान कथा-विन्यास के प्रति उनके स्थायी आकर्षण को उजागर करता है।
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