इश्त्वान तोमोरकेन्य की “Különféle magyarok meg egyéb népek” 20वीं सदी के आरंभ में लिखी गई लघुकथाओं का संग्रह है। यह कृति रोचक कथाओं और सहज रूप से जुड़ जाने वाले पात्रों के माध्यम से हंगरी के जीवन और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं का जीवंत चित्र प्रस्तुत करती है। इन कहानियों में हंगरी के ग्रामीण समुदायों की चुनौतियाँ, हास्य और परंपराएँ प्रतिबिंबित होती हैं। संग्रह का आरंभ एक दूधवाले और उसके घोड़े बार्शोन से जुड़ी कथा से होता है, जिसने छह वर्षों तक निष्ठापूर्वक उसकी सेवा की है। जब घोड़ा बीमार पड़ जाता है, तो दूधवाला और उसकी पत्नी दोनों उसके संभावित निधन और उससे होने वाले आर्थिक प्रभावों से जूझते हैं। कथा में हास्य का पुट तब आता है, जब इसमें दंपति के विचित्र संबंधों, उनकी आर्थिक कठिनाइयों और नगरवासियों की प्रतिक्रियाओं का चित्रण किया जाता है। ये दृश्य एक साथ हल्के-फुल्केपन और मार्मिकता का स्वर स्थापित करते हैं तथा आरंभ से ही तोमोरकेन्य की कहानी कहने में सामाजिक टिप्पणी को पिरोने की क्षमता को उजागर करते हैं।