František Omelka की «Hore dědinú: A jiné povídky» 20वीं सदी के आरंभ में लिखी गई लघुकथाओं का संग्रह है। यह पुस्तक स्लोवाक्को क्षेत्र के बच्चों के जीवन का अन्वेषण करती है और उनके रोमांच, भय तथा बचपन के सरल किंतु गहन क्षणों को समेटती है। इसमें मासूमियत, साहस और बड़े होने की खुशियों व कठिनाइयों जैसे विषयों का मेल है, जिसमें Oldřich और Toneček जैसे सहज रूप से जुड़ाव पैदा करने वाले बाल पात्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। संग्रह के आरंभ में पाठकों का परिचय Oldřich से होता है, जो खदान में काम कर रहे अपने पिता के लिए दोपहर का भोजन लेकर जाता है। सुंदर प्राकृतिक दृश्य से अभिभूत होकर वह कल्पनाओं में खो जाता है और अंततः सो जाता है, लेकिन उसकी नींद तब खुलती है जब वह अपने सीने पर आराम कर रहे एक साँप से जुड़ी भयावह स्थिति में फँस जाता है। इसी बीच, आरंभिक कथाओं में बचपन के उत्सवपूर्ण क्षणों की झलक भी मिलती है, जैसे क्रिसमस को लेकर उत्साह और पारंपरिक समारोहों के दौरान बच्चों की चंचल शरारतें। ये आरंभिक कहानियाँ युवाओं के बीच रोमांच, खतरे और मित्रता के विषयों को आपस में पिरोती हैं तथा पूरे संग्रह में आगे आने वाली सहज और जीवन से जुड़ी कथाओं की नींव रखती हैं।