विस्काउंटेस मैरिएन मार्गरेट कॉम्पटन कस्ट अल्फ़ोर्ड की 《नीडलवर्क ऐज़ आर्ट》 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में लिखी गई सजावटी कढ़ाई और कला के रूप में उसके महत्व की एक विद्वत्तापूर्ण पड़ताल है। इस कृति में लेखिका का उद्देश्य सुई-काम की धारणा को महज़ एक शिल्प से ऊपर उठाकर एक सम्मानित कलात्मक अनुशासन के रूप में स्थापित करना है, और इसे ललित कला के अन्य रूपों के समकक्ष रखना है। अल्फ़ोर्ड सुई-काम की शैलियों और तकनीकों के ऐतिहासिक विकास का पता लगाने के साथ-साथ पूरे इतिहास में उनके सौंदर्यात्मक और सांस्कृतिक महत्व पर बल देती हैं। पुस्तक का आरंभ लेखिका के उद्देश्य और उनके अध्ययन के विस्तार का परिचय देता है तथा कला के रूप में सुई-काम की उन लंबे समय से स्थापित जड़ों पर विचार करता है, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से कम महत्त्व दिया गया है। अल्फ़ोर्ड चर्चा करती हैं कि सुई-काम सांस्कृतिक और कलात्मक इतिहास के साथ किस प्रकार अंतर्गुंथा हुआ है और विभिन्न सभ्यताओं तथा कढ़ाई की कला में उनके योगदानों के बीच संबंध स्थापित करती हैं। वह रेखांकित करती हैं कि उनके लेखन का उद्देश्य केवल मौजूदा साहित्य में एक कमी को पूरा करना ही नहीं, बल्कि विद्वानों और practitioners दोनों को इस क्षेत्र की सराहना करने और इसे आगे विकसित करने के लिए प्रेरित करना भी है। यह पाठ सुई-काम में प्रयुक्त शैलियों, डिज़ाइनों, सामग्रियों और तकनीकों की व्यापक समीक्षा की आधारभूमि तैयार करता है तथा संकेत देता है कि इसका महत्व उन कलाओं के बराबर है जिन्हें परंपरागत रूप से अधिक मान्यता प्राप्त है।